कीच लगी ब्रज खिरक की

Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे

Verse 105 of 229

कवि नख शिख वर्णन करें, रमे रहें रिषि रंग। मो हित तो वृषभानुजा, चरणकमल ही छंग॥ - ब्रज के दोहे कवि नख से वर्णन करे, ऋषि अश्रु से रहे। यदि मेरी रुचि अच्छी है तो वृषभानुजा, चरण कमल सुन्दर हैं.. -ब्रज के दोहे
कीच लगी ब्रज खिरक कीकीच लगी ब्रज खिरक की