कीच लगी ब्रज खिरक की
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 106 of 229
खड़ी छड़ी ले राधिका, प्रिय को नृत्य सिखात।
मंथर गति जब ही बनि, डर सो थर थर्रात॥
- ब्रज के दोहे
राधिका, मजबूत रहो, अपने प्रिय को नृत्य सिखाओ। गति धीमी होते ही डर भय में बदल जाता है.. - braj ke dohe