कीच लगी ब्रज खिरक की

Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे

Verse 108 of 229

को कबि वरनन कर सकै, ब्रज की रज को मूल। जाके कण-कण में मिली, युगल चरण की धूल॥ - ब्रज के दोहे ब्रज राज्य की उत्पत्ति का वर्णन कब किया जा सकता है? जेके कण-कण मन मिली, युगल चरण की धूल.. - दोहे ब्रज के
कीच लगी ब्रज खिरक कीकीच लगी ब्रज खिरक की