कीच लगी ब्रज खिरक की

Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे

Verse 11 of 229

बाँकौ मारग प्रेम कौ, कहत बनै नहिं बैन। नैना श्रवन जु होत हैं, श्रवन होत हैं नैन॥ - ब्रज के दोहे वह कहते हैं, जो प्रेम का मार्ग पा सकता है, वह प्रेम का मार्ग नहीं बन सकता। श्रवण की आँखे गरम है, श्रवण की आँखे गरम है.. -ब्रज के दोहे
कीच लगी ब्रज खिरक कीकीच लगी ब्रज खिरक की