कीच लगी ब्रज खिरक की
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 12 of 229
बैननि के नैननि सौं, दरस्यौ युगल स्वरूप।
नैननि के बैननि सौं, बरस्यौ बरन अनूप॥
- ब्रज के दोहे
नैनाणी सौं, दरसयु युगल रूप बैनाणी का। नैनाणी के बैनाणी सौं, बरसौ बरन अनुप.. - दोहे ब्रज प्रेमियों का कहना है कि उन्होंने प्रेम के अनूठे दोहे रूप को वाणी की आंखों से देखा है और आंखों की वाणी से उसका वर्णन किया है।