कीच लगी ब्रज खिरक की

Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे

Verse 120 of 229

मैं काको जानो नहीं, ना मोहि जानें कोय। तुमसो प्रीति लगी रहे, हम तुम जानें दोय॥ - ब्रज के दोहे न मैं काको को जानता हूं, न कोई मोही को जानता है। तुमसो प्रीति लागी रहे, हम तुम जाने दोये...-ब्रज के दोहे
कीच लगी ब्रज खिरक कीकीच लगी ब्रज खिरक की