कीच लगी ब्रज खिरक की
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 121 of 229
मैं नहीं देखूँ और को, मोय न देखे और।
मैं नित देखोई करूँ, तुम दोऊनि सब ठौर॥
- ब्रज के दोहे
मैं और कुछ नहीं देखना चाहता, मैं और कुछ नहीं देखना चाहता। मैं तुम्हें रोज देखूंगा, तुम दोनों हर जगह हो.. -ब्रज के दोहे