कीच लगी ब्रज खिरक की
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 14 of 229
वंशीवट यमुना-निकट, जहाँ सघन घन छाँह।
प्यारी मुख बिहसत भई, डारि गले पिय बाँह॥
- ब्रज के दोहे
अवश्य ही यमुना के निकट होगा, जहाँ सघन रेत छनती है। प्रिय भाई, गले लगा लो प्रिय, गले लगा लो प्रिय... -ब्रज के दोहे