कीच लगी ब्रज खिरक की
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 146 of 229
पड़ी रहो या गैल में, साधु संत चली जाए।
ब्रजरज उड़ मस्तक लगे, तो मुक्ति मुक्त ह्वै जाए॥
- ब्रज के दोहे
पड़े रहो या आँधी में, जा सन्त। यदि ब्रजराज मस्तक उड़ा दे तो उसकी मुक्ति हो जाएगी.. -ब्रज मुक्ति के दोहे - भगवान श्री कृष्ण पूछते हैं कि मैं सबको मुक्ति प्रदान करता हूं, मेरी मुक्ति कैसे होगी? तब श्रीकृष्ण मुक्ति से कहते हैं- तुम ब्रज की गलियों में रहो, जहां भक्तजन ध्यान करते हैं। क्या ब्रज-रज का प्रभाव ऐसा है कि सिर पर पड़ने पर ही मुक्ति मिलेगी? तुम भी मुक्त हो जाओगे. (यहाँ ब्रज-रज की महिमा यह है कि वह मुक्ति भी देती है।)