कीच लगी ब्रज खिरक की

Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे

Verse 151 of 229

प्रीति को बाण लग्यो तन पै, बदनामी को बीज मै बोय चुकी री। मेरो कान्ह कुंवर सु तो नेह लग्यो, जिंदगानी सो हाथ मै धोय चुकी री॥ - ब्रज के दोहे प्रेम मेरा शरीर बन गया है, बुराई मेरा लड़का बन गई है। कुंवारी होकर भी मेरे कान भर गए, मेरी जान चली गई... -ब्रज के दोहे
कीच लगी ब्रज खिरक कीकीच लगी ब्रज खिरक की