कीच लगी ब्रज खिरक की

Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे

Verse 153 of 229

प्रेम छिपाये ना छिपे, जा घट परगट होय। जद्यपि मुख बोलै नहीं, नैन देत हैं रोय॥ - ब्रज के दोहे प्यार छुपे या न छुपे, उजागर जरूर हो जाता है। मुँह भले ही न बोले, आँखें रोती हैं... -ब्रज के दोहे
कीच लगी ब्रज खिरक कीकीच लगी ब्रज खिरक की