कीच लगी ब्रज खिरक की

Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे

Verse 154 of 229

प्रेम धाम वृन्दाविपिन, मध्य मधुर वर जोर। सरिता रस सिंगार की, जगमगात चहुँ ओर॥ - ब्रज के दोहे प्रेम धाम वृन्दाविपिन, मध्य मधुर वर जोर। नदी रस से सजी है, चारों ओर जगमगा रही है.. -ब्रज के दोहे
कीच लगी ब्रज खिरक कीकीच लगी ब्रज खिरक की