कीच लगी ब्रज खिरक की
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 160 of 229
राधा जीवन सार है, भुक्ति मुक्ति और भोग।
बिनु राधा राधा कहे, जीभ जारिबे जोग॥
- ब्रज के दोहे
राधा जीवन, भक्ति, मुक्ति और आनंद का सार हैं। बिनु राधा राधा कहे, जिब जरिबे जोग.. -ब्रज के दोहे