कीच लगी ब्रज खिरक की
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 161 of 229
राधा पद रज स्वाति जल, चातक मेरौ हीय।
मोती से अंसुआ ढरैं, मनुआ मन भरि पीय॥
- ब्रज के दोहे
राधा पद रज स्वाति जल, चटक मेरौ हिय। मोतियों से छलके अश्रु, मन में खूब मनुआ पिया.. -ब्रज के दोहे