कीच लगी ब्रज खिरक की
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 167 of 229
राधा श्री राधा रटूँ, नित नित आठौ याम।
जा उर श्री राधा बसैं, वही हमारौ धाम॥
- ब्रज के दोहे
राधा श्री राधा रतुं, नित नित आठौ यं। वहाँ जाओ, श्री राधा विराजमान हैं, वही हमारा निवास है.. - braj ke dohe