कीच लगी ब्रज खिरक की
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 168 of 229
राधा सुख की मूल है, राधा रतन अमोल।
बिनु राधा-राधा कहे, जीवन कौ का मोल॥
- ब्रज के दोहे
सुख मूल राधा का, राधा रतन अमोल। राधा-राधा कहे बिना जीवन का क्या मूल्य? -ब्रज के दोहे
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 168 of 229