कीच लगी ब्रज खिरक की

Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे

Verse 3 of 229

अहो किशोरी स्वामिनी, गोरी परम दयाल। तनिक कृपा की कोर लखि, कीजै मोहि निहाल॥ - ब्रज के दोहे हे किशोरी स्वामिनी, गोरी, बड़ी दयालु। थोड़ी सी कृपा लिखो, मुझको सुखी करो.. -ब्रज के दोहे
कीच लगी ब्रज खिरक कीकीच लगी ब्रज खिरक की