कीच लगी ब्रज खिरक की

Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे

Verse 206 of 229

तब सखियन पिय सौ कह्यौ, सुनहुँ रसिकवर राइ। जो रस चाहत आपनौ, गहौ कुँवरि के पाँइ॥ - ब्रज के दोहे तो फिर मित्रो सौ शब्द पी जाओ, मैं मधुर प्रेमी हूँ। जो अपना रस चाहते हैं, कुंवारे गेहूं का पानी... -ब्रज के दोहे
कीच लगी ब्रज खिरक कीकीच लगी ब्रज खिरक की