कीच लगी ब्रज खिरक की
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 216 of 229
व्रज तजि अनत न जाई हों, यही हमारी टेक।
भूतल भार उतारि हों, धरि हों रूप अनेक॥
- ब्रज के दोहे
व्रज तजि अनत न जाई होना, यहीं हम विश्राम करते हैं। पृथ्वी है संपूर्ण सतह, पृथ्वी के हैं अनेक रूप.. - braj ke dohe