कीच लगी ब्रज खिरक की

Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे

Verse 219 of 229

वृन्दावन के नाम सौं, पुलकि उठत सब अंग। जिहि थल श्यामा श्याम नित, करत रहत रस रंग॥ - ब्रज के दोहे वृन्दावन के नाम से ही शरीर के सारे अंग खिल उठते हैं। जहाँ भूमि दिन-रात अँधेरी है, रस बहता रहता है... -ब्रज के दोहे
कीच लगी ब्रज खिरक कीकीच लगी ब्रज खिरक की