कीच लगी ब्रज खिरक की

Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे

Verse 220 of 229

वृन्दावन के वृक्ष को, मर्म न जाने कोय। जहाँ डाल-डाल अरु पात-पात पे, श्री 'राधे राधे' होय॥ - ब्रज के दोहे वृन्दावन की झाड़ियों का मतलब कोई नहीं जानता। विश्व फैल रहा है, हर सतह पर फैल रहा है, श्री 'राधे-राधे' सुनाई देगा.. - Braj ke dohe
कीच लगी ब्रज खिरक कीकीच लगी ब्रज खिरक की