कीच लगी ब्रज खिरक की
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 221 of 229
वृन्दावन की चूहरी, चली मुक्ति ठुकराय।
व्यास कहै अचरज कहाँ, यह राधा महल ख्वाय॥
- ब्रज के दोहे
वृन्दावन की बेटी, उसने मुक्ति को अस्वीकार कर दिया। व्यास कहते हैं आश्चर्य कहां है, यह राधा महल सुंदर है... -ब्रज के दोहे