कीच लगी ब्रज खिरक की
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 4 of 229
ऐरे कठिन अहीर के, नेंक पीर पहिचानि।
तब मुख दर्शन कारनै छाँड़ि दई कुल कॉंनि॥
- ब्रज के सवैया
अहीर के लिए यह कठिन समय है, मेरी आँखों ने दर्द देखा है। तो फिर मुख दर्शन कराऊं, चाय दा कुल कोनी.. -ब्रज की सवैया