कीच लगी ब्रज खिरक की

Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे

Verse 34 of 229

ब्रज समुद्र मथुरा कमल, वृंदावन मकरंद। ब्रज वनिता सब पुष्प है, मधुकर गोकुलचंद॥ - ब्रज के दोहे ब्रज समुद्र मथुरा कमल, वृन्दावन मकरन्द। ब्रज वनिता सब फूल हैं, मधुकर गोकुलचंद.. -ब्रज के दोहे
वृज रानी श्री राधिके, महिमा अमित अपार। कीच लगी ब्रज खिरक की