कीच लगी ब्रज खिरक की
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 35 of 229
ब्रज-वृन्दावन अघट रस, राधा कृष्ण सरूप।
नाम लेत पातक कटै, ज्यों हरिनाम अनूप॥
- ब्रज के दोहे
ब्रज-वृंदावन अघट रस, राधा कृष्ण सरूप। नाम लेट पटक कटै, अस हरि नाम अनूप.. -ब्रज के दोहे
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 35 of 229