कीच लगी ब्रज खिरक की
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 37 of 229
ब्रजमण्डल की स्वमिनी, मेरी मन अभिलाष।
जन्म जन्म मोहि दीजिये, श्री वृन्दावन वास॥
- ब्रज के दोहे
ब्रजमण्डल की स्वामिनी, मेरे मन की अभिलाषा। हर जन्म मुझको भाये, श्री वृन्दावन बसाए... - braj ke dohe