कीच लगी ब्रज खिरक की
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 5 of 229
अलख ब्रह्म अच्युत अगम, जाकौ ओर न छोर।
ताकौ करि काजर नयन, देत कृपा की कोर॥
- ब्रज के दोहे
अलख ब्रह्म अपरिमेय है, इसका कोई अंत नहीं है। अपनी आँखों से देखो मुझको, दया का हृदय दो.. -ब्रज के दोहे