कीच लगी ब्रज खिरक की

Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे

Verse 40 of 229

चलो सखी वहाँ जाइये, जहाँ बसें बृजराज। गोरस बेचन हरि मिले, एक पंथ दो काज॥ - ब्रज के दोहे चलो यार, वहाँ चलते हैं जहाँ बृजराज रहते हैं। गोरस बेचन हरि मिले, एक पंथ दोउ काज.. -ब्रज के दोहे
कीच लगी ब्रज खिरक कीकीच लगी ब्रज खिरक की