कीच लगी ब्रज खिरक की
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 6 of 229
अमिय सिंधु राधे चरण, सुखद संजीवनी मूरि।
उर भजि सिरधर वापुरे, श्री राधा पद धूरी॥
- ब्रज के दोहे
अमी सिन्धु राधे चरण, सुखी संजीवनी मुरी। उर भाजी सिराधर वापुरे, श्री राधा पद धुरी.. - braj ke dohe