कीच लगी ब्रज खिरक की

Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे

Verse 53 of 229

एक हि तन मन प्राण है, दोउ रस प्रतिपाल। कुंजविहारिणी लाडिली, कुंजबिहारी लाल॥ - ब्रज के दोहे शरीर, मन और जीवन एक हैं, प्रत्येक क्षण के दो सार हैं। कुंजविहारिणी लाड़िली, कुंजबिहारी लाल.. - braj ke dohe
कीच लगी ब्रज खिरक कीकीच लगी ब्रज खिरक की