कीच लगी ब्रज खिरक की

Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे

Verse 56 of 229

गहवर बन अरु साँकरी, गलियन लीला होय। तब ही अनुभव होत जब, भाव सरस हिय पोय॥ - ब्रज के दोहे गड्ढे संकरे हो जाते हैं और सड़कें कीचड़युक्त हो जाती हैं। अनुभव तभी होता है जब भाव मधुर हो.. -ब्रज के दोहे
कीच लगी ब्रज खिरक कीकीच लगी ब्रज खिरक की