कीच लगी ब्रज खिरक की
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 57 of 229
गौर श्याम की कृपा बिन, जानि सकै कोउ नाहिं।
कोटि जन्म तप होय किन, परसि सकै नहिं छाइँ॥
- ब्रज के दोहे
गौर श्याम कृपा बिनु, जाने न कोय। जिसने लाख जन्म सहे, पर फ़ारसी न बन सका.. - braj ke dohe