कीच लगी ब्रज खिरक की

Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे

Verse 65 of 229

हित आह्लाद स्वरूपिनी, मोहनि-मोहन वाम। नित आराधन करत हरि, यातै राधा नाम॥ - ब्रज के दोहे आह्लाद, स्वरूपिणी को मार डालो, मोहनी-मोहन को छोड़ दो। श्रीहरि का भजन नित करूँ, राधा नाम का... -ब्रज के दोहे
कीच लगी ब्रज खिरक कीकीच लगी ब्रज खिरक की