कीच लगी ब्रज खिरक की
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 66 of 229
इन कजरारी अंखियन में, बस्यो रहत दिन रात।
प्रीतम प्यारे है सखी, ताते साँवल गात॥
- ब्रज के दोहे
कजरारी दिन-रात अँखियन में बसती है। प्रिय प्रिय मित्र, पिछले कुछ वर्ष... -ब्रज के दोहे
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 66 of 229