कीच लगी ब्रज खिरक की

Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे

Verse 67 of 229

इत उत मन भटकै नहीं, फँसे न माया जाल। चरण कमल में चित्त रमें, हे करुणासिंधु कृपाल॥ - ब्रज के दोहे यह मन की भटकन नहीं, यह माया का जल है। अपने मन को चरण कमलों में बसाओ, हे दयालु.. - braj ke dohe
कीच लगी ब्रज खिरक कीकीच लगी ब्रज खिरक की