कीच लगी ब्रज खिरक की
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 69 of 229
जाके दर्शन हेत नित, विह्वल रहत घनश्याम।
तिनके चरनन में बसे, मेरो मन आठों याम॥
- ब्रज के दोहे
घनश्याम हर दिन जेके को देखने के लिए उत्सुक रहता है। तिनके चरन बसे नर, आठों यम से हृदय भर लिया। -ब्रज के दोहे