कीच लगी ब्रज खिरक की

Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे

Verse 70 of 229

जाकी मायावश बिरंचि शिव, नाचत पार न पायो। करतल ताल बजाय ब्रज, युवतिन नाच नचायो॥ - ब्रज के दोहे माया के कारण बिरंचि शिव नृत्य नहीं कर पाएंगे। बजती है ताल ब्रज की, नाचती है बालिका... - दोहे ब्रज के
कीच लगी ब्रज खिरक कीकीच लगी ब्रज खिरक की