कीच लगी ब्रज खिरक की

Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे

Verse 71 of 229

जबहिं द्वार वृषभानु के आए नंदकुमार। तिहि छिन गति और भई रही न देह संभार॥ - ब्रज के दोहे जब वृषभानु का एक नन्दकुमार द्वार पर आया। गति मुझे और आगे ले गई भाई, तन की परवाह नहीं.. - braj ke dohe
कीच लगी ब्रज खिरक कीकीच लगी ब्रज खिरक की