कीच लगी ब्रज खिरक की
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 8 of 229
अपनावै ब्रजवासिनि, तब ह्वै ब्रज सौं हेत।
ब्रज सरूप सूझै तबै, ब्रज तिय अंजन देत॥
- ब्रज के दोहे
अपानवै ब्रजवासिनी, फिर बनी ब्रज सौ। मेरे जैसा है ब्रज, ब्रज ती अंजन देत..-ब्रज के दोहे
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 8 of 229