कीच लगी ब्रज खिरक की

Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे

Verse 86 of 229

जिन राधा पद रस पियौ, मुख रसना करि ओक। पुनि न पिये तिन मातु थन, जाय बसे गोलोक॥ - ब्रज के दोहे जब आप राधा पद रसन पियें तो मुख रसन ठीक से करें। पुनि न पिए तीन मातु थान, जय बसे गोलोक.. - ब्रज के दोहे परम भाग्यशाली रसिक जिन्होंने अपनी जिह्वा की उंगलियां (ओका) बनाकर श्री राधा जू के चरण कमलों का रस पी लिया है, उन्हें कभी माता के चरणों का रस नहीं पीना पड़ता (अर्थात उनका पुनर्जन्म होता है)। चक्र से मुक्त हो जाते हैं)। वह नित्यधाम श्रीगोलोक में जाकर सदैव निवास करता है।
कीच लगी ब्रज खिरक कीकीच लगी ब्रज खिरक की