कीच लगी ब्रज खिरक की

Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे

Verse 87 of 229

जिनके मुक्ति-पिशाचिनी, तन-मन रही समाइ। सोई हरि सौं बिमुख है, फिर पाछै पछिताई॥ - ब्रज के दोहे मोक्ष की ओर ले जाने वाली पिशाच विद्या शरीर और मन को उलझा कर रख देती है। जब हरि सोये, सौ मुख सोये, तब लौट के आये.. -ब्रज के दोहे
कीच लगी ब्रज खिरक कीकीच लगी ब्रज खिरक की