करू मन, नंदनँदनको ध्यान

Braj Vihara — श्री नारायण स्वामी

Verse 14 of 40

(राग बिहाग) करू मन, नंदनँदनको ध्यान। [1] यहि अवसर तोहिं फिर न मिलैगौ, मेरौ कह्यौ अब मान॥ [2] घूँघरवारी अलकैं मुखपै, कुंडल झलकत कान। [3] नारायन अलसाने नैना, झूमत रूप निधान॥ [4] - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, पद सिद्धान्त (9) (राग बिहागा) मुझे अपने मन में ध्यान करने दो, मुझे नंदानंद में ध्यान लगाने दो। [1] यदि मुझे दोबारा यह अवसर नहीं मिला, तो मैं आपको बताऊंगा कि अभी मेरे मन में क्या है.. [2] घुंघरावारी अलकैन मुखपाई, कुंडल झलकत कंपनी [3] नारायण अलसाने नैना, झुम्मत रूप निधान.. [4] - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, पद सिद्धांत (9)
प्यारी नित ऐसे ही तुमें निहारूंहैलाल तेरे जादु भरे दोउ नैन