ब्रज विहार

Braj Vihara

श्री नारायण स्वामी · 40 verses · Braj

  1. 1. आज इन दोउन पै बलिहारी
  2. 2. आज इन दोउन पै बलि जैये
  3. 3. आवौ सखी मिलि मंगल गावौ
  4. 4. आवौ री यह शोभा
  5. 5. आवौ सखी मिलि मंगल गावौ
  6. 6. ऐसो आनन्द सखी आज लों न देखो कबूँ
  7. 7. प्यारी नित ऐसे ही तुमें निहारूंहै
  8. 8. प्यारी नित ऐसे ही तुमें निहारूंहै
  9. 9. प्यारी नित ऐसे ही तुमें निहारूंहै
  10. 10. प्यारी नित ऐसे ही तुमें निहारूंहै
  11. 11. गोविन्द गोविन्द गोविन्द भज रे
  12. 12. मनमोहन जाकी दृष्टि परत
  13. 13. प्यारी नित ऐसे ही तुमें निहारूंहै
  14. 14. करू मन, नंदनँदनको ध्यान
  15. 15. लाल तेरे जादु भरे दोउ नैन
  16. 16. प्यारी नित ऐसे ही तुमें निहारूंहै
  17. 17. गोविन्द गोविन्द गोविन्द भज रे
  18. 18. मन चेतु नहीं पछितावैगो
  19. 19. मनमोहन जाकी दृष्टि परत
  20. 20. प्यारी नित ऐसे ही तुमें निहारूंहै
  21. 21. मोहि मति रोकै री तू एरी ब्रज नागरी
  22. 22. प्यारी नित ऐसे ही तुमें निहारूंहै
  23. 23. प्यारी नित ऐसे ही तुमें निहारूंहै
  24. 24. प्यारी नित ऐसे ही तुमें निहारूंहै
  25. 25. प्यारी नित ऐसे ही तुमें निहारूंहै
  26. 26. प्यारी नित ऐसे ही तुमें निहारूंहै
  27. 27. प्यारी नित ऐसे ही तुमें निहारूंहै
  28. 28. रसिया को नारि बनावौ री
  29. 29. साँवरे की जिन निरखी मुसिक्यान
  30. 30. प्यारी नित ऐसे ही तुमें निहारूंहै
  31. 31. सखि नँदलाल न आवन पावै
  32. 32. साँवरे क्यों मोसों रिस मानी
  33. 33. सुन्दर अनूप जोरी, अति मन को भावती
  34. 34. प्यारी नित ऐसे ही तुमें निहारूंहै
  35. 35. प्यारी नित ऐसे ही तुमें निहारूंहै
  36. 36. प्यारी नित ऐसे ही तुमें निहारूंहै
  37. 37. प्यारी नित ऐसे ही तुमें निहारूंहै
  38. 38. या साँवरे सों मैं प्रीति लगाई
  39. 39. मन चेतु नहीं पछितावैगो
  40. 40. साँवरे की जिन निरखी मुसिक्यान