प्यारी नित ऐसे ही तुमें निहारूंहै

Braj Vihara — श्री नारायण स्वामी

Verse 16 of 40

लीला युगलस्वरूप की, दुख भंजन सुख दैन। नारायण जे नित सुनैं, गावैं पावैं चैन॥ - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, वंशी लीला (13) लीला युगल रूप में है, दुःख हरती है, सुख देती है। नारायण जे नित सुनैन, गावैं पावैं चैन.. - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, वंशी लीला (13)
लाल तेरे जादु भरे दोउ नैनगोविन्द गोविन्द गोविन्द भज रे