प्यारी नित ऐसे ही तुमें निहारूंहै
Braj Vihara — श्री नारायण स्वामी
Verse 26 of 40
प्यारी जी तिहारे बिन कल न परत है।
मंदिर अटारी चित्रसारी और फुलवारी,
मोहि कछु प्रिय न लगत है॥ [1]
घनो समझायो इत उत बहलायो पुनि,
तौहू मन धीर न धरत है।
एतौ हठ आगे कब कियो नारायण,
जेतौ हठ आज तू करत है॥ [2]
- श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, सम्भ्रम-मानलीला (16)
प्रिय जी, तिहाड़ के बिना कोई कल नहीं है। मुझे मंदिर के अंदर की पेंटिंग और फूल अच्छे नहीं लगते.. [1] आप मुझे समझाते क्यों नहीं, मेरे दिल में सब्र नहीं है। हे नारायण, तुमने मुझे अपना हाथ कब दिया, आज तुमने मुझे अपना हाथ कब दिया.. [2] - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, सम्भ्रम-मनलीला (16)