प्यारी नित ऐसे ही तुमें निहारूंहै

Braj Vihara — श्री नारायण स्वामी

Verse 25 of 40

प्रिय प्रीतम के गुण ललित, निगमागम को सार। नारायण गावै सुनै, निश्चय हो भवपार॥ - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, रास पंचाध्यायी लीला (26) प्रियतम के गुण उत्तम हैं, संगति ही सार है। नारायण गावी को सुनो, आश्वस्त रहो कि तुम संसार से पार हो जाओगे.. - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, रास पंचाध्यायी लीला (26)
प्यारी नित ऐसे ही तुमें निहारूंहैप्यारी नित ऐसे ही तुमें निहारूंहै