साँवरे की जिन निरखी मुसिक्यान
Braj Vihara — श्री नारायण स्वामी
Verse 40 of 40
(राग देश)
युगल छबि देखि मेरो हियरा सिरात।
नींद भरे चलत झूमि के, शिथिल भये सब गात॥ [1]
कह्यो चहत कछु कढ़त कछू मुख, कहत कहत रहि जात।
नारायण या विधि निकुंज में, पहुँचे अति अलसात॥ [2]
- श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, शयन लीला (3)
(राग देश) युगल छवि देख मेरो हियारा सीरत। वह सोने से लेकर जागने, करवट बदलने तक, हर हरकत से डरती है। [1] कछुए का मुँह कहता है कठिन है, कहता रहता है। नारायण या विधि निकुंज नर, आये बहुत देर से.. [2] - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, शयन लीला (3)