मन चेतु नहीं पछितावैगो
Braj Vihara — श्री नारायण स्वामी
Verse 39 of 40
(राग काफी)
यह नैना रिझवार नये री।
एक बेर लखि रूप लाल को, तजि घरबार फकीर भये री॥ [1]
अब देखे बिन डारत आँसू, युग समान पल बीति गये री।
नारायण येहू अति चंचल, फल पाये जो बीज बये री॥ [2]
- श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, युगल छदम लीला (10)
(बहुत हो गये चिथड़े) हाँ नैना रिज़वार नई री। एक बेर लखी रूप लाल, तजि घरबार फकीर भये रे.. [1] अब निर्भय होकर देखो, मानो एक युग से एक क्षण गुजर गया हो। नारायण बहुत चंचल हैं, जो बोया जाता है वही फल काटते हैं.. [2] - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, युगल छदम लीला (10)