नवल कुंज नवनागरी, नव नागर नंदनन्द
Braj Vilasa — श्री ब्रजवासीदास
Verse 12 of 21
नवल कुंज नवनागरी, नव नागर नंदनन्द।
प्रेमसिधु मर्याद तजि, मिले उमॅगि आनन्द॥
- श्री ब्रजवासीदास, ब्रज विलास
नवल कुंज नवनागरी, नव नगर नंदानंद। प्रेमसिधु मर्यादा तजि, मिले उमेगी आनंद.. - श्री ब्रजवासीदास, ब्रज विलास