नवल कुंज नवनागरी, नव नागर नंदनन्द

Braj Vilasa — श्री ब्रजवासीदास

Verse 16 of 21

सब ब्रज गोपिन के बसी, बात यहै मन आन। हरि-राधा दोऊ मिलैं, निशि वासर यह ध्यान॥ - श्री ब्रजवासीदास, ब्रज विलास सब लोग बसाओ ब्रज गोपीन, यहीं मेरे मन में बसाओ। हरि-राधा युगल मिलन, निशि वासर यः ध्यान.. - श्री ब्रजवासीदास, ब्रज विलास
नवल कुंज नवनागरी, नव नागर नंदनन्दनवल कुंज नवनागरी, नव नागर नंदनन्द